राजस्थानी राबड़ी क्या है? जानें बनाने की विधि, सामग्री और फायदे
Rajasthani Rabdi - राजस्थान का खान-पान हमेशा से सादा, पौष्टिक और देसी रहा है. यहाँ की जलवायु और जीवनशैली के अनुसार बनाए गए व्यंजन आज भी लोगों की सेहत का आधार हैं. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में से एक है राजस्थानी राबड़ी, जिसे बाजरे के आटे और छाछ से तैयार किया जाता है. यह राबड़ी मीठी नहीं बल्कि नमकीन, हल्की खट्टी और बेहद पौष्टिक होती है.

राजस्थानी राबड़ी किसे कहते हैं?
राजस्थान में बनने वाली राबड़ी एक देसी भोजन है, जिसे बाजरे के आटे (लोई) को छाछ में भिगोकर तैयार किया जाता है. ये गोले 4 से 5 घंटे तक छाछ में रखे जाते हैं, जिससे वे अच्छी तरह फूल जाते हैं और छाछ का खट्टापन अपने अंदर समा लेते हैं. इसके बाद इन्हें चूल्हे पर गर्म किया जाता है और थोड़ा नमक डालकर परोसा जाता है. सरल भाषा में कहा जाए तो बाजरा + छाछ + समय = राजस्थानी राबड़ी.
यह भोजन खासतौर पर ग्रामीण राजस्थान, खेतों में काम करने वाले लोगों और गर्मियों के मौसम में बहुत पसंद किया जाता है.
राजस्थानी राबड़ी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
राजस्थानी राबड़ी की सबसे खास बात यह है कि इसमें बहुत कम और सस्ती सामग्री लगती है.
बाजरे का आटा
छाछ (मट्ठा)
नमक (स्वाद अनुसार)
पानी (आवश्यकतानुसार)
देसी चूल्हा या गैस
Rajasthani Rabdi - राजस्थानी राबड़ी बनाने की विधि
- सबसे पहले साफ़ बर्तन में बाजरे के आटा लें.
- एक बड़े बर्तन में छाछ डालें और उसमें ये बाजरे का आटा डालकर के गोल बनाएं.
- अब इस बर्तन को 4 से 5 घंटे के लिए ढककर रख दें, ताकि आटा छाछ में अच्छी तरह फूल जाएं.
- तय समय बाद राबड़ी को चूल्हे या गैस पर धीमी आंच पर गर्म करें.
- गरम करते समय इसे हल्के हाथ से चलाते रहें.
- अंत में स्वाद अनुसार थोड़ा नमक डालें और अच्छी तरह मिला लें.
अब आपकी राजस्थानी नमकीन राबड़ी तैयार है.
राजस्थानी राबड़ी खाने के फायदे / Rajasthani Rabdi Benefits
- शरीर को ठंडक देती है - छाछ से बनी होने के कारण यह शरीर को ठंडा रखती है, खासकर गर्मियों में.
- पाचन के लिए बहुत फायदेमंद - छाछ और बाजरा दोनों ही पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं.
- लंबे समय तक भूख नहीं लगती - बाजरा फाइबर से भरपूर होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है.
- श्रम करने वालों के लिए उत्तम भोजन - खेतों में काम करने वाले या मेहनत करने वाले लोगों के लिए यह ऊर्जा का अच्छा स्रोत है.
- हड्डियों और मांसपेशियों के लिए लाभकारी - इसमें कैल्शियम और मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं.
- कम खर्च में पौष्टिक भोजन - गरीब और मध्यम वर्ग के लिए यह एक सस्ता और हेल्दी विकल्प है.
राजस्थानी राबड़ी कैसे और कब खाई जाती है?
राजस्थानी राबड़ी को आमतौर पर कच्ची प्याज़, हरी मिर्च, लहसुन की चटनी, बाजरे की रोटी के साथ खाया जाता है. यह भोजन खासतौर पर दोपहर के समय खाया जाता है.
राजस्थानी राबड़ी सिर्फ एक व्यंजन नहीं बल्कि राजस्थान की संस्कृति और जीवनशैली की पहचान है. सादगी, पोषण और स्वाद — तीनों का बेहतरीन मेल है यह राबड़ी. आज के समय में जब लोग फास्ट फूड की ओर जा रहे हैं, तब ऐसी पारंपरिक देसी रेसिपी हमें सेहत और संस्कृति से जोड़े रखती हैं.
राजस्थानी राबड़ी क्या होती है?
राजस्थानी राबड़ी एक पारंपरिक देसी भोजन है, जिसे बाजरे के आटे से बने गोलों को छाछ में भिगोकर तैयार किया जाता है. ये गोले 4 से 5 घंटे तक छाछ में रखे जाते हैं, जिससे वे नरम और खट्टे स्वाद वाले हो जाते हैं. बाद में इन्हें चूल्हे पर गर्म कर थोड़ा नमक डालकर खाया जाता है. यह राबड़ी मीठी नहीं बल्कि नमकीन होती है और राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में बहुत लोकप्रिय है.
राजस्थानी राबड़ी बनाने में कौन-कौन सी सामग्री लगती है?
राजस्थानी राबड़ी बनाने के लिए बहुत कम और सादी सामग्री की जरूरत होती है, जैसे बाजरे का आटा, छाछ, थोड़ा नमक और पानी. किसी भी तरह के मसाले या घी का उपयोग इसमें नहीं किया जाता, जिससे यह हल्की, सुपाच्य और सेहत के लिए फायदेमंद बनती है. यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है.
राजस्थानी राबड़ी को कितने समय तक छाछ में रखना चाहिए?
राजस्थानी राबड़ी के बाजरे के गोलों को सामान्यतः 4 से 5 घंटे तक छाछ में भिगोकर रखा जाता है. इस दौरान गोले छाछ को अच्छे से सोख लेते हैं और नरम हो जाते हैं. अगर मौसम ठंडा हो तो समय थोड़ा ज्यादा भी लग सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा देर रखने से स्वाद खट्टा हो सकता है.
राजस्थानी राबड़ी खाने के क्या फायदे हैं?
राजस्थानी राबड़ी पाचन के लिए बहुत लाभकारी मानी जाती है क्योंकि इसमें छाछ और बाजरा दोनों होते हैं. यह शरीर को ठंडक देती है, पेट को लंबे समय तक भरा रखती है और मेहनत करने वाले लोगों को भरपूर ऊर्जा देती है. गर्मियों के मौसम में यह लू से बचाने में भी मदद करती है.
राजस्थानी राबड़ी किस समय और किसके साथ खाई जाती है?
राजस्थानी राबड़ी आमतौर पर दोपहर के भोजन में खाई जाती है.इ से कच्ची प्याज, हरी मिर्च, लहसुन की चटनी या बाजरे की रोटी के साथ परोसा जाता है. ग्रामीण इलाकों में यह पूरा भोजन मानी जाती है और खेतों में काम करने वाले लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं.




