खेजड़ी बचाओ आंदोलन 2026 | बीकानेर जोधपुर समेत खेजड़ी को बचाने की लड़ाई में पूरा राजस्थान - Khejri Bachao Andolan
Khejri Bachao Andolan | Khejri Andolan Rajasthan | Khejri Bachao Andolan Bikaner | Khejri Bachao Andolan News - राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए शुरू हुआ खेजड़ी बचाओ आंदोलन 2026 अब केवल बीकानेर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश में एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है. विकास परियोजनाओं और सौर ऊर्जा प्लांटों के नाम पर हो रही अंधाधुंध कटाई के खिलाफ उठी यह आवाज अब सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है. पर्यावरण प्रेमियों ने साफ कर दिया है कि जब तक खेजड़ी और अन्य वृक्षों के संरक्षण के लिए सख्त कानून नहीं बनेगा, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा.

Khejri Bachao Andolan Bikaner - बीकानेर से उठी चिंगारी, पूरे राजस्थान में फैला आंदोलन
बीकानेर की धरती से शुरू हुआ यह आंदोलन अब जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर सहित राजस्थान के कई जिलों तक फैल चुका है. जिला और तहसील स्तर पर प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं और हर दिन नए लोग इस मुहिम से जुड़ रहे हैं. युवाओं के साथ-साथ बुजुर्ग और महिलाएं भी इस संघर्ष में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं, जिससे यह आंदोलन एक सामाजिक और जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा बन गया है.
Khejri Bachao Andolan - आमरण अनशन के बाद अब कर्मिक अनशन की शुरुआत
खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत पहले आमरण अनशन किया गया था, जिसमें 100 से अधिक अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ गई थी. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि 14 आंदोलनकारियों को पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें से कई अब भी इलाजरत हैं. सरकार के आश्वासन के बाद आमरण अनशन तो समाप्त किया गया, लेकिन आंदोलन की धार कमजोर नहीं पड़ी. अब आंदोलनकारियों ने अगले चरण के रूप में कर्मिक अनशन शुरू किया है, जिसके तहत रोजाना 50 पर्यावरण प्रेमी अनशन पर बैठेंगे.
खेजड़ी: सिर्फ़ पेड़ नहीं, राजस्थान की पहचान
आंदोलनकारियों का कहना है कि खेजड़ी केवल एक वृक्ष नहीं बल्कि राजस्थान की संस्कृति, पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन की रीढ़ है. यह पेड़ मरुस्थलीय क्षेत्रों में जीवन को सहारा देता है और जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके बावजूद विकास के नाम पर हजारों खेजड़ी के पेड़ों को काटा जा रहा है, जिसे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.
‘ट्री प्रोटेक्शन रूल्स’ लागू करने की मुख्य मांग
खेजड़ी बचाओ आंदोलन की सबसे बड़ी और केंद्रीय मांग है कि राज्य सरकार जल्द से जल्द ट्री प्रोटेक्शन रूल्स लागू करे. आंदोलनकारियों का तर्क है कि जब तक वृक्ष संरक्षण के लिए सख्त और स्पष्ट कानून नहीं बनेगा, तब तक कटाई पर रोक संभव नहीं है. इस कानून के लागू होने से पेड़ काटने से पहले कड़ी अनुमति प्रक्रिया और अनिवार्य पौधरोपण जैसे नियम प्रभावी होंगे, जिससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा.
कलेक्ट्रेट के पास महापड़ाव जारी, सरकार पर दबाव कायम
बीकानेर कलेक्ट्रेट के पास चल रहा महापड़ाव अब भी जारी है और आंदोलनकारी सरकार पर लोकतांत्रिक दबाव बनाए हुए हैं. अस्पताल में भर्ती साथियों की हालत को लेकर चिंता के बावजूद आंदोलनकारियों का संकल्प अडिग है. उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी एक जिले या संगठन की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है.
खेजड़ी बचाओ आंदोलन बना जन-आंदोलन
आज खेजड़ी बचाओ आंदोलन हर उस राजस्थानी की आवाज बन चुका है जो अपनी धरती, प्रकृति और विरासत से प्रेम करता है. सड़कों पर गूंजते पर्यावरण बचाओ के नारे यह संकेत दे रहे हैं कि यह संघर्ष अब थमने वाला नहीं है. सरकार के लिए यह समय परीक्षा का है कि वह कब और कैसे इन मांगों को कानून का रूप देती है.
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